Aadinath Bhagwan Ki Aarti | आदिनाथ भगवान की आरती | Adinath Bhagwan Ki Aarti Lyrics
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| आदिनाथ भगवान की आरती |
1) Aadinath Bhagwan Ki Aarti -
जगमग जगमग आरती कीजै, आदिश्वर भगवान की ।
प्रथम देव अवतारी प्यारे, तीर्थंकर गुणवान की ।।
जगमग जगमग आरती कीजै, आदिश्वर भगवान की ।
अवधपुरी में जन्मे स्वामी, राजकुंवर वो प्यारे थे ।
मरु माता बलिहार हुई, जगती के तुम उजियारे थे ।
द्वार द्वार बजी बधाई, जय हो दयानिधान की ।।
जगमग जगमग आरती कीजै, आदिश्वर भगवान की ।
बड़े हुए तुम राजा बन गये, अवधपुरी हरषाई थी ।
भरत बाहुबली सुत मतवारे मंगल बेला आई थी ।
करें सभी मिल जय जयकारे, भारत पूत महान की ।।
जगमग जगमग आरती कीजै, आदिश्वर भगवान की ।
नश्वरता को देख प्रभुजी, तुमने दीक्षा धारी थी ।
देख तपस्या नाथ तुम्हारी, यह धरती बलिहारी थी ।
प्रथम देव तीर्थंकर की जय, महाबली बलवान की ।।
जगमग जगमग आरती कीजै, आदिश्वर भगवान की ।
बारापाटी में तुम प्रकटे, चादंखेड़ी मन भाई है,
जगह जगह के आवे यात्री, चरणन शीश झुकाई है ।
फैल रही जगती में नमजी महिमा उसके ध्यान की ।।
जगमग जगमग आरती कीजै, आदिश्वर भगवान की ।
जगमग जगमग आरती कीजै, आदिश्वर भगवान की ।
जगमग जगमग आरती कीजै, आदिश्वर भगवान की ।
प्रथम देव अवतारी प्यारे, तीर्थंकर गुणवान की ।।
जगमग जगमग आरती कीजै, आदिश्वर भगवान की ।
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श्री आदिनाथ भगवान की आरती |
2) Aadinath Bhagwan Ki Aarti -
आरती उतारूं आदिनाथ भगवान की
माता मरुदेवि पिता नाभिराय लाल की
रोम रोम पुलकित होता देख मूरत आपकी
आरती हो बाबा, आरती हो,
प्रभुजी हमसब उतारें थारी आरती
तुम धर्म धुरन्धर धारी, तुम ऋषभ प्रभु अवतारी
तुम तीन लोक के स्वामी, तुम गुण अनंत सुखकारी
आरती उतारूं आदिनाथ भगवान की
माता मरुदेवि पिता नाभिराय लाल की
इस युग के प्रथम विधाता, तुम मोक्ष मार्म के दाता
जो शरण तुम्हारी आता, वो भव सागर तिर जाता
हे… नाम हे हजारों ही गुण गान की…
आरती उतारूं आदिनाथ भगवान की
माता मरुदेवि पिता नाभिराय लाल की
तुम ज्ञान की ज्योति जमाए, तुम शिव मारग बतलाए
तुम आठो करम नशाए, तुम सिद्ध परम पद पाये
आरती उतारूं आदिनाथ भगवान की
माता मरुदेवि पिता नाभिराय लाल की
मैं मंगल दीप सजाऊं, मैं जग-मग ज्योति जलाऊं
मैं तुम चरणों में आऊं, मैं भक्ति में रम जाऊं
हे झूम-झूम-झूम नाचूं करूं आरती।
आरती उतारूं आदिनाथ भगवान की।
माता मरुदेवि पिता नाभिराय लाल की।
माता मरुदेवि पिता नाभिराय लाल की
रोम रोम पुलकित होता देख मूरत आपकी
आरती हो बाबा, आरती हो,
प्रभुजी हमसब उतारें थारी आरती
तुम धर्म धुरन्धर धारी, तुम ऋषभ प्रभु अवतारी
तुम तीन लोक के स्वामी, तुम गुण अनंत सुखकारी
आरती उतारूं आदिनाथ भगवान की
माता मरुदेवि पिता नाभिराय लाल की
इस युग के प्रथम विधाता, तुम मोक्ष मार्म के दाता
जो शरण तुम्हारी आता, वो भव सागर तिर जाता
हे… नाम हे हजारों ही गुण गान की…
आरती उतारूं आदिनाथ भगवान की
माता मरुदेवि पिता नाभिराय लाल की
तुम ज्ञान की ज्योति जमाए, तुम शिव मारग बतलाए
तुम आठो करम नशाए, तुम सिद्ध परम पद पाये
आरती उतारूं आदिनाथ भगवान की
माता मरुदेवि पिता नाभिराय लाल की
मैं मंगल दीप सजाऊं, मैं जग-मग ज्योति जलाऊं
मैं तुम चरणों में आऊं, मैं भक्ति में रम जाऊं
हे झूम-झूम-झूम नाचूं करूं आरती।
आरती उतारूं आदिनाथ भगवान की।
माता मरुदेवि पिता नाभिराय लाल की।
3] Aadinath Bhagwan Ki Aarti -
जय आदिनाथ स्वामी,
बाबा जय आदिनाथ स्वामी ।
जय आदिनाथ स्वामी,
बाबा जय आदिनाथ स्वामी ।
दुखहारी सुखकारी तुम हो,
दुखहारी सुखकारी तुम हो
त्रिभुवन के स्वामी,
त्रिभुवन के स्वामी
जय आदिनाथ स्वामी,
बाबा जय आदिनाथ स्वामी ।
नाभिराय मरूदेवी के नंदन,
नाभिराय मरूदेवी के नंदन
संतन आधार, संतन आधार
नाथ निरंजन सब दुख भंजन,
नाथ निरंजन सब दुख भंजन
सम्पति दातार, सम्पति दातार
जय आदिनाथ स्वामी,
बाबा जय आदिनाथ स्वामी ।
करुणा सिंधु दयाल दयानिधि,
करुणा सिंधु दयाल दयानिधि
जय जय गुणधारी, जय जय गुणधारी
जय आदिनाथ स्वामी, बाबा जय आदिनाथ स्वामी ।
वांछित पूर्ण दुःख दर्द चुरन,
वांछित पूर्ण दुःख दल चुरन
सब जन सुखकारी,
सब जन सुखकारी
जय आदिनाथ स्वामी,
बाबा जय आदिनाथ स्वामी ।
4] Aadinath Bhagwan Ki Aarti -
जय जय आरती आदि जिणंदा,
नाभिराया मरुदेवी को नन्दाः
पहेली आरती पूजा कीजे,
नरभव पामीने लाहो लीजे,
जय जय आरती आदि जिणंदा,
नाभिराया मरुदेवी को नन्दाः ॥१॥
दूसरी आरती दीनदयाळा,
धूलेवा मंडपमां जग अजवाळ्या,
जय जय आरती आदि जिणंदा,
नाभिराया मरुदेवी को नन्दाः ॥२॥
तीसरी आरती त्रिभुवन देवा,
सुर नर इंद्र करे तोरी सेवा,
जय जय आरती आदि जिणंदा,
नाभिराया मरुदेवी को नन्दाः ॥३॥
चौथी आरती चउ गति चूरे,
मनवांछित फल शिवसुख पूरे,
जय जय आरती आदि जिणंदा,
नाभिराया मरुदेवी को नन्दाः ॥४॥
पंचमी आरती पुण्य उपाया,
मूळचंदे ऋषभ गुण गाया,
जय जय आरती आदि जिणंदा,
नाभिराया मरुदेवी को नन्दाः ॥५॥
नाभिराया मरुदेवी को नन्दाः
पहेली आरती पूजा कीजे,
नरभव पामीने लाहो लीजे,
जय जय आरती आदि जिणंदा,
नाभिराया मरुदेवी को नन्दाः ॥१॥
दूसरी आरती दीनदयाळा,
धूलेवा मंडपमां जग अजवाळ्या,
जय जय आरती आदि जिणंदा,
नाभिराया मरुदेवी को नन्दाः ॥२॥
तीसरी आरती त्रिभुवन देवा,
सुर नर इंद्र करे तोरी सेवा,
जय जय आरती आदि जिणंदा,
नाभिराया मरुदेवी को नन्दाः ॥३॥
चौथी आरती चउ गति चूरे,
मनवांछित फल शिवसुख पूरे,
जय जय आरती आदि जिणंदा,
नाभिराया मरुदेवी को नन्दाः ॥४॥
पंचमी आरती पुण्य उपाया,
मूळचंदे ऋषभ गुण गाया,
जय जय आरती आदि जिणंदा,
नाभिराया मरुदेवी को नन्दाः ॥५॥
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